Shiv Ji Ki Aarti Hindi Mai | शिव जी की आरती हिंदी में

Shiv Ji Ki Aarti Hindi Mai – आरती भी पूजा का एक हिंदू धार्मिक अनुष्ठान है, पूजा का एक हिस्सा है, जिसमें प्रकाश (आमतौर पर एक लौ से) एक या एक से अधिक देवताओं को चढ़ाया जाता है। आरती (s) देवता की प्रशंसा में गाए जाने वाले गीतों को भी संदर्भित करती है, जब प्रकाश की पेशकश की जा रही है।

हिंदू धर्म में सावन महीने को विशेष महत्व दिया जाता है। भगवान भोलेनाथ को सावन महीना विशेष प्रिय हैं। इसलिए इस महीने भगवान शिव की पूजा करने से जीवन की सभी समस्याएं खत्म हो जाती हैं। विश्वास है कि शिव जी अपने भक्तों को त्वरित ही प्रसन्न कर देते हैं। कहते हैं कि शिव जी को बेलपत्र और जल अर्पित करने से ही उनके भक्तों का मन लग जाता है। सृष्टि की सुरक्षा के लिए विष पीने वाले भोलेनाथ अपने भक्तों की हर इच्छा को जल्दी पूरा करते हैं।

शिव जी की दया और करुणा को भी जाना जाता है। इसलिए सावन महीने में भगवान भोलेनाथ की कृपा प्राप्त करने के लिए उनके भक्त विधि-विधान से पूजा करते हैं और साथ ही कांवड़ यात्रा भी करते हैं। भगवान भोलेनाथ की पूजा के दौरान शिव चालीसा और शिवजी की आरती भी करनी चाहिए। ऐसा करने से भगवान भोलेनाथ प्रसन्न होते हैं। यहां भगवान भोलेनाथ की आरती पढ़ें।

Video Source : T-Series Bhakti Sagar

शिव जी की आरती – Shiv Ji Ki Aarti


ॐ जय शिव ओंकारा,भोले हर शिव ओंकारा।
ब्रह्मा विष्णु सदा शिव अर्द्धांगी धारा ॥ ॐ हर हर हर महादेव…॥

एकानन चतुरानन पंचानन राजे।
हंसानन गरुड़ासन वृषवाहन साजे ॥ ॐ हर हर हर महादेव..॥

दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे।
तीनों रूपनिरखता त्रिभुवन जन मोहे ॥ ॐ हर हर हर महादेव..॥

अक्षमाला बनमाला मुण्डमाला धारी।
चंदन मृगमद सोहै भोले शशिधारी ॥ ॐ हर हर हर महादेव..॥

श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे।
सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे ॥ ॐ हर हर हर महादेव..॥

कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूल धर्ता।
जगकर्ता जगभर्ता जगपालन करता ॥ ॐ हर हर हर महादेव..॥

ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।
प्रणवाक्षर के मध्ये ये तीनों एका ॥ ॐ हर हर हर महादेव..॥

काशी में विश्वनाथ विराजत नन्दी ब्रह्मचारी।
नित उठि दर्शन पावत रुचि रुचि भोग लगावत महिमा अति भारी ॥ ॐ हर हर हर महादेव..॥

लक्ष्मी व सावित्री, पार्वती संगा ।
पार्वती अर्धांगनी, शिवलहरी गंगा ।। ॐ हर हर हर महादेव..।।

पर्वत सौहे पार्वती, शंकर कैलासा।
भांग धतूर का भोजन, भस्मी में वासा ।। ॐ हर हर हर महादेव..।।

जटा में गंगा बहत है, गल मुंडल माला।
शेष नाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला ।। ॐ हर हर हर महादेव..।।

त्रिगुण शिवजीकी आरती जो कोई नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछित फल पावे ॥ ॐ हर हर हर महादेव..॥

ॐ जय शिव ओंकारा भोले हर शिव ओंकारा★★

ब्रह्मा विष्णु सदाशिव अर्द्धांगी धारा ।। ॐ हर हर हर महादेव….।।…

शिव आरती का अर्थ और महत्व | Shiv Ji Ki Aarti Ka Arth

  1. “ॐ जय शिव ओंकारा, भोले हर शिव ओंकारा।”
    • व्याख्या: यहाँ ‘ॐ’ ब्रह्मा, विष्णु और महेश्वर (भगवान शिव) की उपासना के लिए उपयोग होता है। “जय शिव ओंकारा” शब्दों से भगवान शिव की जयकार की जा रही है। यह एक भक्तिपूर्ण अभिवादन है जो भगवान शिव की प्रशंसा करने का उद्देश्य रखता है।
  2. “ब्रह्मा विष्णु सदा शिव अर्द्धांगी धारा।”
    • व्याख्या: यह भक्ति भगवान ब्रह्मा, विष्णु और महेश्वर (शिव) के एकत्व को दर्शाती है, जिन्हें त्रिमूर्ति कहा जाता है। वे एक ही ब्रह्म के तीन रूप हैं, जो सृष्टि, पालन और संहार कार्य करते हैं।
  3. “एकानन चतुरानन पंचानन राजे।”
    • व्याख्या: यह वर्णन भगवान शिव के विभिन्न रूपों का है। वे चार या पांच मुखवाले रूपों में विराजमान होते हैं।
  4. “हंसानन गरुड़ासन वृषवाहन साजे॥”
    • व्याख्या: यह बताता है कि भगवान शिव के वाहन के रूप में हंस, गरुड़ और नंदी जैसे प्राणी विभिन्न रूपों में प्रकट होते हैं।
  5. “अक्षमाला बनमाला मुण्डमाला धारी।”
    • व्याख्या: भगवान शिव अक्षमाला (माला), बनमाला और मुण्डमाला धारण करते हैं। वे अपरमाला, ध्वजमाला और मृगछाला भी धारण करते हैं।
  6. “श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे।”
    • व्याख्या: भगवान शिव विभिन्न रंगों के वस्त्र पहनते हैं और उनके शरीर पर अंगभूषण होते हैं।
  7. “कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूल धरता।”
    • व्याख्या: यह वर्णन भगवान शिव के हाथ में कमंडलु, चक्र और त्रिशूल के बारे में है, जो उनके चमकदार अस्त्र-शस्त्र हैं।
  8. “ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।”
    • व्याख्या: यह श्लोक बताता है कि विवेक विहीन लोग ब्रह्मा, विष्णु और शिव को अलग-अलग भाग्यक्रमों के स्वामी मानते हैं।
  9. “काशी में विश्वनाथ विराजत नन्दी ब्रह्मचारी।”
    • व्याख्या: यह वर्णन काशी के विश्वनाथ मंदिर के बारे में है, जहाँ भगवान शिव के रूप में विराजमान हैं, साथ में उनके वाहन नंदी भी हैं।
  10. “लक्ष्मी व सावित्री, पार्वती संगा । पार्वती अर्धांगनी, शिवलहरी गंगा ।।”
    • व्याख्या: यह बताता है कि भगवान शिव की सहायिकाएँ हैं लक्ष्मी, सावित्री, और पार्वती, जो उनके साथ समान हैं। शिवलहरी गंगा इसके साथ विराजमान हैं।
  11. “पर्वत सौहे पार्वती, शंकर कैलासा। भांग धतूर का भोजन, भस्मी में वासा।।”
    • व्याख्या: यह श्लोक बताता है कि भगवान शिव के साथ पार्वती कैसे हैं और कैसे वे कैलास पर्वत पर निवास करते हैं। वे भांग और धतूर के पत्तों का भोजन करते हैं और अपने शरीर पर भस्म लगाते हैं।
  12. “जटा में गंगा बहत है, गल मुंडल माला। शेष नाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला।।”
    • व्याख्या: यह वर्णन भगवान शिव की जटाओं में गंगा नदी कैसे बह रही है, उनके गले में मुंडल माला कैसे है और शेषनाग जैसे नाग उनकी गर्दन पर लिपटाते हैं।
  13. “त्रिगुण शिवजीकी आरती जो कोई नर गावे। कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछित फल पावे॥”
    • व्याख्या: यह श्लोक कहता है कि जो भी व्यक्ति भगवान शिव की यह आरती गाता है, उसको भगवान शिव का आशीर्वाद मिलता है और वह अपनी मनोकामना पूरी करता है।

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