Mahilaon Mein Thyroid ke Lakshan | महिलाओं में थायराइड के लक्षण

महिलाओं में थायराइड के लक्षण – कई बार शरीर में ऐसी समस्‍याएं या परेशानियां पैदा होने लगती हैं जिनका पता तक नहीं चल पाता हैथायराइड की बीमारी से महिलाएं ज्‍यादा ग्रस्‍त होती हैं लेकिन ‍किसी ना किसी कारणवश महिलाएं इसे नज़रअंदाज कर देती हैं। महिलाओं में थायराइड ग्रंथि बहुत महत्‍वपूर्ण होती है क्‍योंकि ये शरीर के अधिकतर हार्मोंस को नियंत्रित करती है। थायराइड ग्रंथि में किसी प्रकार की गड़बड़ी होने पर हार्मोन असंतुलन हो सकता है इसलिए महिलाओं के लिए बहुत जरूरी है कि वो थायराइड की समस्‍या को अनदेखा ना करें।

थायरॉइड की बीमारी एक बड़ी जनसंख्या को अपनी चपेट में ले चुकी है। हालांकि आमतौर पर इसे महिलाओं की बीमारी माना जाता है। लेकिन यह दिक्कत पुरुषों को नहीं होती, ऐसा मानना सही नहीं है। यहां Thyroid के लक्षणों और अन्य दिक्कतों के बारे में बताया जा रहा है। अगर आपमें ये लक्षण हैं तो तुरंत डॉक्टर की सलाह लें

थायराइड ग्लैंड गले के बीचो-बीच एक ऑर्गन होता है। इसका काम थायराइड हार्मोन पैदा करना है। थायराइड हार्मोन बहुत जरूरी हार्मोन होता है। यह दिल, दिमाग, त्वचा, बालों और मांसपेशियों को अत्‍यधिक प्रभावित करता है। इसलिए अगर किसी कारणवश थायराइड ग्लैंड काम करना बंद कर दे या काम ज्यादा करने लगे तो दोनों ही स्थिति में थायराइड प्रॉब्‍लम का शिकार हो सकते हैं। कई बार थायराइड ग्लैंड द्वारा थायराइड हार्मोन ज्यादा उत्‍पादित होने लगता है जिसे हाइपरथायराइडिज्म कहते हैं। अगर थायराइड ग्रंं‍थि कम मात्रा में इस हार्मोन का उत्‍पादन करने लगे तो इसे हाइपोथायरायडिज्म कहते हैं। 

थायरॉइड क्या है? | What is Thyroid?

थायराइड क्या है (Thyroid Kya Hota Hai): थायराइड एक ऐसी बीमारी है, जिससे अधिकतर लोग ग्रस्त रहते हैं। पुरूषों के मुकाबले यह बीमारी महिलाओं में ज्यादा देखी जाती है। थायराइड (thyroid in hindi) मानव शरीर में पाए जाने वाले एंडोक्राइन ग्लैंड में से एक है। थायरायड ग्रंथि गर्दन मे श्वास नली के ऊपर होती है, जिसका आकार तितली जैसा होता है। यह ग्रंथि थाइराक्सिन नामक हार्मोन बनाती है, जो शरीर की एनर्जी, प्रोटीन उत्पादन व अन्य हार्मोन्स के प्रति होने वाली संवेदनशीलता को कंट्रोल में रखता है।

यह द्विपिंडक रचना हमारे गले में स्वरयंत्र के नीचे Cricoid Cartilage के लगभग समान स्तर पर स्थित होती है। शरीर की चयापचय क्रिया में थायरॉइड ग्रंथि का विशेष योगदान होता है।

यह Thyroid ग्रन्थि Tri–iodothyronin (T3) और Thyrocalcitonin नामक हार्मोन स्रावित करती है। ये हार्मोन शरीर के चयापचय दर और अन्य विकास तंत्रों को प्रभावित करते हैं। Thyroid harmone हमारे शरीर की सभी प्रक्रियाओं की गति को नियंत्रित करता है।

इस बीमारी के लक्षण बहुत मामूली और अलग-अलग मरीज में अलग-अलग हो सकते हैं। कुछ सामान्य लक्षण जो हाइपोथायरॉइडिज़म के ज्यादातर मरीजों में देखने को मिलते हैं –

  1. त्वचा का रुखापन
  2. आवाज में बदलाव
  3. बाल तेजी से झड़ना
  4. कब्ज रहना
  5. थकान महसूस करना
  6. मांसपेशियों में ऐंठन होना
  7. हल्की-सी ठंड भी बर्दाश्त ना कर पाना
  8. नींद आने में समस्या
  9. माहवारी (Periods)संबंधी दिक्कतें
  10. मोटापा बढ़ना
  11. स्तनों से अपने आप वाइट डिस्चार्ज होना
  12. पसीना कम आना
  13. त्वचा का रंग बदलना

थायरॉइड के प्रकार

थायरॉइड ग्रंथि विकार के दो प्रकार हैं-

  1. थायरॉइड ग्रंथि की अतिसक्रियता (Hyperthyrodism)
  2. अल्पसक्रियता (Hypothyrodism)
  3. थायरॉइड ग्रंथि की अतिसक्रियता (Hyperthyrodism)

इसे ही Hyperthyroidism  कहते हैं। पुरुषों की तुलना महिलाओं में यह समस्या अधिक देखी जाती है। इसकी पहचान इन परेशानियों से की जा सकती है। थायराइड जड़ से खत्म करने के उपाय को सही तरीके से काम करने के लिए उसके लक्षणों के बारे में पता होना चाहिए।

थायरॉइड हार्मोन (Thyroid harmone) की अधिकता के कारण शरीर में चयापचय यानी Metabolis  बढ़ जाता है और हर काम तेजी से होने लगता है।

  1. घबराहट
  2. चिड़चिड़ापन
  3. अधिक पसीना आना।
  4. हाथों का काँपना।
  5. बालों का पतला होना एवं झड़ना।
  6. अनिद्रा (नींद ना आने की परेशानी)
  7. मांसपेशियों में कमजोरी एवं दर्द रहना।
  8. दिल की धड़कन का बढ़ना।
  9. बहुत भूख लगने के बाद भी वजन घटता है।
  10. महिलाओं में मासिक धर्म की अनियमितता देखी जाती है।
  11. ओस्टियोपोरोसिस (Osteoporosis) हो जाता है जिसकी वजह से हड्डी में कैल्शियम (Calcium) तेजी से खत्म होता है।

अल्पसक्रियता (Hypothyrodism)

अवटु ग्रंथि की अल्प सक्रियता के कारण Hypothyroidism हो जाता है। इसकी पहचान इन परेशानियों से की जा सकती हैः-

  1. धड़कन की धीमी गति।
  2. हमेशा थकान बने रहना।
  3. अवसाद (Depression)
  4. सर्दी के प्रति अधिक संवेदनशील होना।
  5. Metabolism धीमा पड़ने के कारण वजन बढ़ना।
  6. नाखूनों का पतला होना एवं टूटना।
  7. पसीने में कमी।
  8. त्वचा में सूखापन आना और खुजली होना।
  9. जोड़ों में दर्द और मांसपेशियों में अकड़न होना।
  10. बालों का अधिक झड़ना।
  11. कब्ज
  12. आँखों में सूजन।
  13. बार-बार भूलना।
  14. कन्फ्यूज रहना, सोचने-समझने में असमर्थ होना।
  15. मासिक धर्म में अनियमितता होना। 28 दिन की साइकिल का 40 दिन या इससे अधिक दिन का होना।
  16. चेहरे और आँखों में सूजन।
  17. खून में कोल्स्ट्रॉल (Cholestrol) का स्तर बढ़ जाना।
  18. महिलाओं में इसके कारण बांझपन आ सकता है।

थायरॉइड के शुरुआती लक्षण ये हो सकते हैं-

  1. मांसपेशियों में, शरीर के जोड़ों में अक्सर दर्द रह सकता है. पेनकिलर या दवा लगाने के बाद भी दर्द फिर लौटकर आ सकता है
  2. थायरॉइड बढ़ जाए तो गर्दन में सूजन हो सकती है. ऐसे में तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए.
  3. हाइपोथायरॉइड में त्वचा में रूखापन आ सकता है.बालों का तेजी से झड़ना, भौंहों के बालों का झड़ना जैसी समस्याएं हो सकती हैं.
  4. कब्ज की समस्या बद से बदतर हो सकती है.महिलाओं को पीरियड्स के दौरान पेट में दर्द रह सकता है. 
  5. अनियमित पीरियड्स की समस्या.तेजी से वजन बढ़ सकता है. 
  6. शरीर में कॉलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ सकता या बहुत कम हो सकता है.
  7. बिना मेहनत किए ही बेहद थकान महसूस हो सकती है. कई लोगों को घबराहट की समस्या हो सकती है.

Mahilaon Mein Thyroid ke Lakshan – यह एक तथ्य है कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं को थायरॉयड के सही से काम नहीं करने का अधिक खतरा रहता है। हालांकि, महिलाओं इससे अधिक प्रभावित क्यों होती है इसका कारण ज्ञात नहीं है। महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान और रजोनिवृत्ति के दौरान हार्मोन के उच्च प्रवाह का अनुभव होता है।

एक और महत्वपूर्ण कारक आनुवंशिक प्रवृत्ति है। प्रत्येक 5 महिलाओं में से 1 को टीएसएचबी जीन के आनुवंशिक उत्परिवर्तन के परिणामस्वरुप थायरॉइड होता है। अधिकांशतः असामान्य थायरॉयड कार्यप्रणाली एक स्वप्रतिरक्षा स्थिति है।

प्रत्येक व्यवहार्य गर्भावस्था में कम से कम एक बार गर्भ धारण के बाद थायराइड कार्यप्रणाली की जाँच करना आम बात है, खासकर गर्भाधान के तुरंत बाद। इसका माहवारी खत्म होने की शुरुआत में भी जाँच की जानी चाहिए। स्क्रीनिंग में टीएसएच (थायराइड स्टिमुलेटिंग हॉर्मोन) और टी4 के लिए जाँच शामिल हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि अमेरिकन एसोसिएशन ऑफ़ क्लिनिकल एंडोक्रिनोलॉजिस्ट और अमेरिकन थायराइड एसोसिएशन (एटीए) द्वारा सुझाए गए मानकों के अनुरूप हैं। दिशानिर्देश थायराइड नोडुलर रोग, ग्रेव्स रोग, गोइटर, हाशिमोटो बीमारी की बुनियादी नैदानिक और चिकित्सीय जानकारी देता है।